कनु प्रिया : धर्मवीर भारती की प्रेम कविता आज के युग में
कर्म स्वधर्म निर्णय दायित्व
मुझ तक आते आते सब बदल गए है
मुझे सुन पड़ता है केवल
राधन! राधन !राधन
जब जवानी में यह कविता पढ़ी थी तब इसका मतलब केवल प्रेम से जुड़ा लगता था पर आज बीस बरस की सरकारी सेवा और अन्ना के आंदोलन की गूंज में इसका नया अर्थ मिल रहा है की हम अपने रोजमर्रा के कर्मो को दायित्व को भी कृष्ण और राधा के प्रेम की गहराई से करे तो जीवन महाभारत में हम भी गीता के सन्देश को जी सकते है.